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जम्मू-कश्मीर में हुआ बीजेपी पीडीपी के बीच ब्रेकअप, आइये जानते हैं अब कैसे बन सकती है सरकार

जम्मू-कश्मीर में पिछले करीब साढ़े तीन साल से चल रही बीजेपी-पीडीपी गठबंधन सरकार गिर गई है| बीजेपी  ने महबूबा मुफ्ती सरकार से समर्थन वापस लेकर राज्यपाल शासन की डिमांड की है तो महबूबा ने भी बिना देर किए राज्यपाल को अपना इस्तीफा भेज दिया है| यूं तो जब इस गठबंधन का ऐलान हुआ था तभी से राजनीतिक हलकों में इसे सबसे बेमेल और लंबा न चलने वाला करार दिया जा रहा था लेकिन लोकसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले बीजेपी ने जिस झटके के साथ समर्थन वापसी का ऐलान किया है उसे उसके मिशन 2019 के लिए मास्टरस्ट्रोक और मजबूरी दोनों माना जा रहा है|

पीडीपी से गठबंधन तोड़ने के ऐलान के साथ ही बीजेपी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लगाया जाए| अब आपको बताते हैं कि जम्मू कश्मीर में सरकार बनाने के क्या विकल्प हैं|

87 सदस्यों वाली जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पीडीपी की 28, बीजेपी की 25, कांग्रेस की 12 और अन्य की सात सीटें हैं. बीजेपी और पीडीपी दोनों ने 2014 के विधानसभा चुनाव के बाद गठबंधन किया था|

कैसे बनेगी सरकार

सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी को बहुमत के लिए 44 सीटें चाहिए. गठबंधन टूटने के बाद अब जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने के लिए ये विकल्प हैं-
महबूबा मुफ्ती किसी और पार्टी के साथ सरकार बनाएं ये एक विकल्प हो सकता है. उनकी 28 सीटों वाली पीडीपी, 12 सीटों वाली कांग्रेस और अन्य सात के साथ मिलकर 47 सीटों के साथ सरकार बनाने का दावा पेश करे|

दूसरा विकल्प ये है कि 25 सीटों वाली पार्टी बीजेपी, 15 सीटों वाली उमर अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस और सात अन्य सीटों के साथ मिलकर 47 सीटों के साथ सरकार बनाने का दावा पेश करे|

एक विकल्प ये भी है कि केंद्र राज्यपाल शासन लगाए और राज्यपाल वहां पर शासन चलाएं|
पीडीपी से नाता तोड़े जाने के फैसले से संबंधित चिट्ठी बीजेपी ने राज्यपाल एनएन वोहरा को भेज दी है| इस बीच राज्य में मुख्य विपक्षी नेशनल कांफ्रेंस ने बैठक बुलाई है| इस बैठक में आगे की रणनीतियों पर चर्चा की जाएगी| बीजेपी महासचिव राम माधव ने इस ऐलान के बाद कहा कि ”जनता के जनादेश को ध्यान में रखकर हमने जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ सरकार चलाने का निर्णय लिया था| लेकिन पीडीपी-बीजेपी गठबंधन को लेकर आगे चलना संभव नहीं हो रहा था|’ उन्होंने कहा कि कहा, ”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की सहमति के बाद गठबंधन तोड़ने पर फैसला किया गया|”

गठबंधन तोड़ने के बाद मेहबूबा के बोल :

जम्मू कश्मीर की पहली महिला मुख्यमंत्री रहीं महबूबा मुफ़्ती ने गठबंधन तोड़ने के लिए बीजेपी की ये कहते हुए आलोचना की है कि राज्य में सख़्ती की नीति नहीं चल सकती|

उन्होंने श्रीनगर में संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”ये सोचकर बीजेपी के साथ गठबंधन किया था कि बीजेपी एक बड़ी पार्टी है, केंद्र में सरकार है| हम इसके ज़रिए जम्मू कश्मीर के लोगों के साथ संवाद और पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध चाहते थे, उस समय अनुच्छेद 370 को लेकर घाटी के लोगों के मन में संदेह थे लेकिन फिर भी हमने गठबंधन किया था ताकि संवाद और मेलजोल जारी रहे|”

अपने पिता मुफ़्ती मोहम्मद सईद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, ”मुफ्ती साहब ने जिस मकसद के लिए ये गठबंधन किया था, उसके लिए हमने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की, संवाद और मेलजोल के लिए आगे भी हमारी कोशिश जारी रहेगी|

क्या बीजेपी की ओर से गठबंधन तोड़ने पर आपको झटका लगा, इस सवाल पर महबूबा मुफ्ती ने कहा, ”शॉक नहीं लगा, गठबंधन सत्ता के लिए नहीं किया था. अब हम कोई और गठबंधन नहीं तलाशना चाहते|”

राममाधव ने बताई गठबंधन तोड़ने की वजह:

इससे पहले जम्मू कश्मीर के लिए बीजेपी के प्रभारी राममाधव ने दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में गठबंधन से अलग होने की वजह बताते हुए कहा, ”हमने तीन साल पहले जो सरकार बनाई थी, जिन उद्देश्यों को लेकर बनाई थी, उनकी पूर्ति की दिशा में हम कितने सफल हो पा रहे हैं, उस पर विस्तृत चर्चा हुई|”

उन्होंने कहा, ”पिछले दिनों जम्मू कश्मीर में जो घटनाएं हुई हैं, उन पर तमाम इनपुट लेने के बाद प्रधानमंत्री मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से परामर्श लेने के बाद आज हमने निर्णय लिया है कि गठबंधन सरकार में चलना संभव नहीं होगा|”

‘आज का फ़ैसला अप्रत्याशित’

पीडीपी का कहना है कि आपस में कुछ दिक्कतें थीं लेकिन बीजेपी का आज का फ़ैसला अप्रत्याशित है|

पीडीपी प्रवक्ता रफ़ी अहमद मीर ने श्रीनगर में स्थानीय पत्रकार माजिद जहांगीर से कहा, ”घाटी में हिंसा बढ़ना बीजेपी के फैसले की वजह नहीं हो सकती| कुछ राजनीतिक मुद्दे हैं जिनमें बीजेपी का रुख़ अलग है हमारा अलग है जैसे सेना को विशेषाधिकार, अनुच्छेद 370, 35 ए, लेकिन हमने साथ चलने की हमेशा कोशिश की|”

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