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सुषमा स्वराज ने ट्विटर पोल करा कर ट्रोल्स पर किया तीखा पलटवार, 57 फीसदी लोग उनके साथ खड़े रहे

लखनऊ के मुस्लिम दंपती तन्वी सेठ और अनस सिद्दीकी के पासपोर्ट मामले में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए ट्विटर पर ट्रोल किया गया था। सुषमा स्वराज ने इन ट्रोल्स पर ट्विटर पोल के जरिये पलटवार किया है। रविवार को कराए पोल में उन्होंने सवाल किया, ‘मैंने कुछ ट्वीट लाइक किए हैं। क्या आप ऐसे ट्वीट्स को सही ठहराते हैं?

रविवार शाम तक 1,10,000 लोगों ने पोल में हिस्सा लिया। इनमें 57 फीसदी लोग सुषमा स्वराज के पक्ष में हैं, जबकि 43 फीसदी ने ट्रोल्स का साथ दिया।

अब देश के गृह मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल ने भी इस मुद्दे पर सुषमा स्वराज का साथ दिया है|

दरअसल, सुषमा स्वराज पिछले 10 दिनों से ट्विटर पर इस तरह से लोगों के ‘अपशब्द’ का शिकार हो रही हैं| कुछ लोग इसे ट्रोलिंग कह रहे हैं, तो कुछ इसे सुषमा स्वराज के कामकाज पर अपनी राय बता रहे हैं| हालांकि सुषमा स्वराज ने अपने पोस्ट में खुद ऐसे लोगों को ट्रोल नहीं कहा है|

मामला उस वक़्त और आगे बढ़ गया जब उनके पति स्वराज कौशल ने एक ट्विटर यूज़र का स्क्रीन शॉट ट्वीट किया जिसमें उनसे कहा गया कि वो उनकी (सुषमा) पिटाई करें और उन्हें मुस्लिम तुष्टिकरण न करने की बात सिखाएं|

हालांकि स्वराज कौशल ने सुषमा का साथ देते हुए ट्वीट किया, “आपके शब्दों ने हमें असहनीय दुख दिया है. आपको एक बात बता रहा हूं कि मेरी मां का 1993 में कैंसर से निधन हो गया. सुषमा एक सांसद और पूर्व शिक्षा मंत्री थीं. वो एक साल अस्पताल में रहीं. उन्होंने मेडिकल अटेंडेंट लेने से मना कर दिया और मेरी मां की ख़ुद देखभाल की.”

लेकिन कहानी यहां से शुरू नहीं होती|

पूरा विवाद तन्वी सेठ पासपोर्ट विवाद से जुड़ा है|

मुसलमान युवक से शादी करने वाली हिंदू महिला के पासपोर्ट को लेकर हुए विवाद के सिलसिले में सुषमा स्वराज ट्रोल हो रहीं थी| 24 जून को सुषमा स्वराज ने ऐसे कुछ ट्वीट्स को री-ट्वीट किया जिनमें उन्हें अपशब्द कहे गए थे| इसके साथ ही सुषमा स्वराज ने जानकारी दी कि जिस समय पासपोर्ट को लेकर यह विवाद हुआ, उस दौरान वह देश से बाहर थीं|

विदेश मंत्री ने ट्वीट करके लिखा, “मैं 17 से 23 जून के बीच भारत से बाहर थी. मेरी ग़ैर-मौजूदगी में क्या हुआ मुझे नहीं मालूम. ख़ैर, मैं कुछ ट्वीट्स से बहुत सम्मानित महसूस कर रही हूं. मैं उन ट्वीट्स को आप सभी के साथ साझा कर रही हूं, इसलिए मैंने उन्हें लाइक किया है|”

सवाल ये उठता है कि केन्द्रीय मंत्री के साथ जब सोशल मीडिया पर ऐसा हो सकता है तो फिर देश की बाक़ी महिलाओं के लिए सोशल मीडिया कितना सुरक्षित है?

ट्रोल्स की परिभाषा

भारत में ट्रोल्स को परिभाषित नहीं किया गया है, हर जानकार इसे अपनी तरह से परिभाषित करते हैं|

साइबर लॉ एक्सपर्ट पवन दुग्गल कहते हैं, “वो व्यक्ति जो इंटरनेट पर ऐसी गतिविधि करे जिससे आपका मानिसक संतुलन बिगड़े वो ट्रोलिंग है|”

सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट एवं साइबर लॉ एक्सपर्ट विराग गुप्ता कहते हैं, “कोई भी व्यक्ति पांच अनचाहे मैसेज किसी अकाउंट से भेजता है, तो उसे ट्रोल कहा जा सकता है|”

ट्रोल शब्द की उत्पत्ति की बात करें तो स्कैनडिनेवियन देशों की पौराणिक कथा में इसका ज़िक्र मिलता है, जिसका इस्तेमाल बुरी भावना वाले ऐसे प्राणी के लिए किया जाता है जो मानव जाति से न हो, या जिसमें राक्षसी प्रवृत्ति हो|

क्या है ट्रोल्स का इलाज?

विराग गुप्ता कहते हैं, सुषमा स्वराज मामले के तूल पकड़ने के बाद कार्रवाई के डर से सुषमा स्वराज को ट्रोल कर रहे अनेक लोगों ने अपना ट्वीटर अकाउंट ही डिलीट कर दिया| इससे यह जाहिर है कि ट्रोल करने वाले अधिकांश लोग गुमनाम या फ़र्जी नामों से ऑपरेट करते हैं और यदि ऐसे अकाउंट्स पर लगाम लग जाये तो ट्रोलिंग की समस्या को नियन्त्रित किया जा सकता है|”

उनके मुताबिक, “देश में बैंक एकाउंट में केवाईसी और किरायेदारों के सत्यापन के लिए कानून की अनिवार्यता है| ट्वीटर में भी वेरीफायड अकाउंट के माध्यम से ग्राहकों का सत्यापन किया जाता है|”

ट्वीटर द्वारा जारी 2016 के आंकड़ों के अनुसार 1.9 लाख या सिर्फ .061 फीसदी ट्वीटर एकाउंट की वेरिफ़ाइड हैं|

लेकिन विराग कहते हैं कि अकाउंट वेरिफ़ाइड होने से ही समस्या का समाधान नहीं हो जाएगा क्योंकि कई बार वेरिफ़ाइड अकाउंट से भी ट्रोलिंग की जाती है|

विराग गुप्ता के मुताबिक, “भारत में पब्लिक रिकॉर्ड्स एक्ट के तहत सोशल मीडिया अकाउंट भारत सरकार का आधिकारिक संवाद केन्द्र हैं| भारतीय कानून के अनुसार सोशल मीडिया कम्पनियों को भारत में शिकायत अधिकारी की नियुक्ति करनी चाहिए|”

 

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