Yuva Chokdi

सफलता क्या है?

मेरे अनुसार सफलता की कोई सर्वमान्य परिभाषा नहीं है| यूँ कहिये तो कोई इंसान सफलता की परिभाषा खुद गढ़ सकता है| सामान्यतः किसी भी व्यक्ति के लिए सफलता के दो मायने होते हैं, पहला खुद की नजर में और दूसरा दूसरों की नजर में| सही मायनों में सफलता खुद की नजर में ही होना कहलाता है| दूसरे तो बस आपके नाम, दौलत, शोहरत का मूल्यांकन कर आपको सफलता का प्रमाणपत्र वो खुद से देने में लगे रहते हैं|

सफलता असीमित है, सफलता का कोई ओर-छोर नहीं है, सफलता अनंत है|

सफल होने की भूख :

जब किसी इंसान को सफलता की भूख लगती है तो वो किसी भी हद तक जा सकता है| इस संसार में अधिकतर इंसान सफल होना चाहते हैं| कुछ इंसान जी-तोड़ मेहनत कर सफल होना चाहते हैं तो कोई बिना कुछ किये जबकि उनको यह अच्छी तरह पता होता है कि बिना मेहनत के, संघर्ष के, समर्पण के सफलता उनके करीब भी नहीं भटकने वाली|

सफलता का पैमाना:

ये जरुरी नहीं कि एक धनाड्य व्यक्ति को ही सफल कहा जाए या फिर वो किसी के लिए प्रेरणा स्रोत हो लेकिन उस खास व्यक्ति के वर्तमान स्थिति को पाने के पीछे के संघर्षों को जान कर जरूर हर कोई प्रेरित हो सकता है|

सफलता का एहसास दूसरों की तुलना में खुद को अच्छे से होता है |
आखिर यह अनुभूति कब और कैसे होती है ?

कोई भी इंसान एक लक्ष्य का निर्धारण करता है, जिसको वह किसी भी हालत में प्राप्त करना चाहता है| चाहे वह एक प्रतियोगी परीक्षा का अभ्यर्थी हो, एक व्यापारी हो, एक फुटकर बिक्रेता हो| यह तो तय है कि सफलता आसानी से नहीं मिलती है और इसे पाने के लिए इंसान को बहुत कुछ न्यौछावर करना पड़ता है|

-नीतेश कुमार
(लेखक पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं|)

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top